सरकारी विभाग और उनके मंत्रालय जब स्थांतरित होते हैं तो किसी को आम आदमी को तो इस बात की कानों कान खबर भी नहीं होती है कि कब ये दफ्तर एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो गया? तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे सरकारी विभाग या फिर उनके मंत्रालयों को स्थानांतरण किया जाता है. जब किसी मंत्रालय या सरकारी विभाग को किसी और जगह पर शिफ्ट किया जाता है तो ये काम बहुत ही टाइट सिक्योरिटी और गोपनीय तरीके से किया जाता है. ये एक बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है इसके लिए रात का समय चुना जाता है. इस दौरान शिफ्टिंग करने वालों का मोबाइल फोन तक प्रतिबंधित होता है और पूरे डॉक्यूमेंट्स को बहुत ही सावधानी और जिम्मेदारी के साथ सुरक्षित तरीके से शिफ्ट किया जाता है.
भारत में अब सरकारी दफ्तरों को राजधानी दिल्ली में बने नए सेक्रेटेरिएट भवन तक सुरक्षित शिफ्ट करने के लिए एक टीम है जिसे कड़े प्रशिक्षण के साथ तैयार किया गया है. इस गोपनीय प्रक्रिया के बारे में जानने वाले लोगों ने बताया कि सेक्शन ऑफिसर या असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर रैंक के अधिकारियों की निगरानी में सरकारी विभाग और मंत्रालयों की शिफ्टिंग की जाती है. ताकि इस दौरान किसी भी संवेदनशील डॉक्यूमेंट में कोई हेर-फेर न हो. सरकारी दफ्तरों या मंत्रालयों की इन विशेष संवेदनशील फाइलों को जिनमें सामान्य प्रशासनिक पत्राचार से लेकर लंबित कैबिनेट प्रस्ताव तक शामिल हो सकते हैं.
7 मंत्रालयों को शिफ्टिंग के आदेश
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने सात मंत्रालयों और विभागों को CCS-03 में शिफ्ट करने की मंजूरी दी. गृहमंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और ग्रामीण विकास मंत्रालय को सचिवालय भवन में स्थान आवंटित किया गया. इनमें से गृह मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, DoPT, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय पहले ही अपनी शिफ्टिंग पूरी कर चुके हैं. एक अधिकारी ने बताया, ‘डॉक्यूमेंट्स रिकॉर्ड का विषय हैं. इसमें निर्णय लेने से पहले पदानुक्रम में प्रत्येक अधिकारी की फाइल नोटिंग्स होती हैं. एक भी फाइल खोने का मतलब जांच या यहां तक कि FIR भी हो सकता है.’ उन्होंने आगे बताया, ‘प्रत्येक विभाग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे, जिन्होंने दस्तावेजों के फिजिकल मैनेजमेंट और ट्रांसपोटेशन की निगरानी के लिए लोगों को नियुक्त किया.’
सुरक्षा के साथ डॉक्यूमेंट्स को सील करना और फिर…
शिफ्टिंग करने वाले अधिकारियों के साथ सचिवालय सुरक्षा बल और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कर्मी भी शामिल होते हैं. जो इस लॉजिस्टिक प्रैक्टिस के दौरान डॉक्यूमेंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. सुरक्षा उपायों में डॉक्यूमेंट्स से लदे वाहनों को सुरक्षित टेप से सील करना, दफ्तरों के भीतर पैकर्स के मोबाइल फोन को बैन करना, विशेष रूप से संवेदनशील दस्तावेजों के कार्टन को सील किए जाने के बाद उन पर सील किए गए हिस्सों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाना शामिल होता है. प्रत्येक बंडल में 20 से 50 फाइलें पैक की जाती हैं जिसमें सबसे संवेदनशील दस्तावेजों को बबल रैप सुरक्षा दी जाती है.
CCTV की निगरानी में होती है शिफ्टिंग
एक शख्स ने बताया कि कुछ मंत्रालय फिर अपने स्तर पर कुछ बदलाव करते हैं. उदाहरण के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अगस्त में अपने निर्धारित शिफ्टिंग से पहले एक ज्ञापन जारी करके आदेश दिया था कि सरकारी फाइलों की शिफ्टिंग के लिए एक बंद बॉडी वाले ट्रकों का उपयोग किया जाना चाहिए और किसी भी इलेक्ट्रानिक उपकरण को डिस्कनेक्ट करने से पहले उससे संबंधित अधिकारियों को नियुक्त किया जाना चाहिए. CISF ने CCS-3 की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली है, जिसमें 10 कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंगों के लिए विशेष रूप से 700 अतिरिक्त कर्मियों को मंजूरी दी गई है. ये सभी 51 केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों को सचिवालय में शिफ्ट करेंगे.
शिफ्टिंग से पहले ड्राई रन पर होता है काम
CCTV सिस्टम की प्रत्येक शिफ्टिंग से 2-3 दिन पहले ड्राई रन किए गए ताकि नए दफ्तर में दस्तावेजों के पहुंचने के क्षण से निरंतर निगरानी कवरेज सुनिश्चित हो. प्रधानमंत्री कार्यालय के साउथ ब्लॉक से नए बने एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव 1 में सितंबर के अंत तक शिफ्टिंग की उम्मीद की जा रही है. इसमें हाई प्रोफाइल शिफ्टिंग के लिए सख्त सुरक्षा के साथ प्रोटोकॉल पालन करने के लिए भी इशारों में कहा गया है. हालांकि इस शिफ्टिंग में काम करने वाले ठेकेदार निजी हैं या सरकारी ये बात अभी स्पष्ट नहीं है. शिफ्टिंग किए जा रहे ये मंत्रालय कई दशकों से उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक से काम कर रहे हैं. जबकि 22 मंत्रालय मौजूदा समय 41,000 कर्मचारियों को शिफ्ट करने वाले वर्तमान सेक्रेटेरियट भवन में कार्यरत हैं.
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